यूरोप में मुसलमान और यहूदी हमेशा एक दूसरे के ख़िलाफ़ ही नहीं होते हैं, वे कई बार एक भी हो जाते हैं. हाल ही में, एक क़ानून के विरोध में दोनों समुदाय एक साथ दिख रहे हैं, दोनों का कहना है कि इस क़ानून से उनकी धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है.
दरअसल ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब बेल्जियम में एक जनवरी से एक क़ानून लागू हुआ, जो जानवरों के कत्ल के परंपरागत तरीके- चाहे वो यहूदी तरीका हो या फिर हलाल करना हो- से जुड़ा है.
दरअसल, जीव अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ता लंबे समय से इस क़ानून की मांग कर रहे थे, लेकिन यहूदी और इस्लामिक नेता इसे उदारवादी एजेंडे की आड़ में धार्मिक आस्थाओं पर हमला बता रहे हैं.
एडोल्फ हिटलर के समय भी यूरोप में ऐसी बहस देखने को मिली थी, जब 1933 में हिटलर ने जर्मनी में जानवरों को बेहोश किए बिना कत्ल करने पर पाबंदी लगा दी थी.
जीव अधिकार बनाम धार्मिक स्वतंत्रता यूरोपीय क़ानून के तहत जीवों की हत्या किए जाने से पहले उसे बेहोश करना ज़रूरी है ताकि उन्हें दर्द महसूस नहीं हो.
बेहोश करने की प्रक्रिया में जानवरों को कत्ल करने से ठीक पहले अचेत किया जाता है लेकिन इन देशों में धार्मिक कारणों से दी जाने वाली जानवरों की बलि में क़ानून से छूट दी जाती रही है, जिसमें परंपरागत तौर पर जानवरों को एक ही वार में गले से काटने की परंपरा रही है.
बेहोश करने की प्रक्रिया में जानवरों को कत्ल करने से ठीक पहले अचेत किया जाता है लेकिन इन देशों में धार्मिक कारणों से दी जाने वाली जानवरों की बलि में क़ानून से छूट दी जाती रही है, जिसमें परंपरागत तौर पर जानवरों को एक ही वार में गले से काटने की परंपरा रही है.
जानवरों के कल्याण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस परंपरा के चलते जानवरों को कत्ल के समय असहनीय दर्द सहना पड़ता है जबकि धार्मिक नेताओं का कहना है कि परंपरागत तरीके में भी जानवरों को कोई दर्द नहीं होता.
इन लोगों का ये भी दावा रहा है कि परंपरागत तरीके से भी जानवरों की तुरंत मौत हो जाती है और इसका तरीका सैकड़ों साल के चलन में बेहतर होता गया है ताकि जानवरों को कम से कम तकलीफ़ हो.
इन दोनों बहसों के बीच में कुछ यूरोपीय देशों ने धार्मिक कारणों से जानवरों का कत्ल करने वाले बूचड़खानों में सख्त प्रावधान लागू किए हुए हैं. इनमें नीदरलैंड्स, जर्मनी, स्पेन और साइप्रस जैसे देश शामिल हैं.
ऑस्ट्रिया और ग्रीस जैसे देशों में जानवरों के काटे जाने के तुरंत बाद उन्हें बेहोश करने का प्रावधान है.
बेल्जियम के तीन क्षेत्रों में से दो क्षेत्र- फ्लैंडर्स और वालोनिया- ने अब डेनमार्क, स्वीडन, स्लोवानिया, नॉर्वे और आइसलैंड की तरह वह प्रावधान अपना लिया है जिसके तहत जानवरों के कत्ल से पहले उसे बेहोश करना ज़रूरी है.
वैसे परंपरागत तरीके से जानवरों की कत्ल का तरीका, कोई इकलौता मुद्दा नहीं है जिसने यहूदियों और मुसलमानों को एकजुट कर दिया है, बल्कि दोनों समुदाय दूसरे मुद्दों पर भी एकजुट होते रहे हैं.
ख़तना और बाल अधिकार पिछले साल, आइसलैंड में एक क़ानून बनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया जो बिना किसी चिकित्सीय वजह के ख़तना किए जाने पर पाबंदी लगाने के विषय पर था, बाद में विवाद बढ़ने पर इसे आइसलैंड की संसद ने पास नहीं किया.
अदालत ने ये भी कहा था कि न तो माता पिता के अधिकार और न ही धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को शारीरिक तौर पर गंभीर और स्थायी बदलाव करने के लिए तर्कसंगत ठहराया जा सकता है.
हालांकि इस फ़ैसले को छह महीने बाद पलट दिया गया लेकिन इसको लेकर यहूदी और मुस्लिम समुदायों में काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी, दोनों समुदायों का कहना था कि ये फ़ैसला उनकी धार्मिक आस्थाओं पर पाबंदी लगाने जैसा है.
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