Monday, January 14, 2019

बूचड़खाने में जानवरों के क़त्ल को लेकर यूरोप में विवाद

यूरोप में मुसलमान और यहूदी हमेशा एक दूसरे के ख़िलाफ़ ही नहीं होते हैं, वे कई बार एक भी हो जाते हैं. हाल ही में, एक क़ानून के विरोध में दोनों समुदाय एक साथ दिख रहे हैं, दोनों का कहना है कि इस क़ानून से उनकी धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है.

दरअसल ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब बेल्जियम में एक जनवरी से एक क़ानून लागू हुआ, जो जानवरों के कत्ल के परंपरागत तरीके- चाहे वो यहूदी तरीका हो या फिर हलाल करना हो- से जुड़ा है.

दरअसल, जीव अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ता लंबे समय से इस क़ानून की मांग कर रहे थे, लेकिन यहूदी और इस्लामिक नेता इसे उदारवादी एजेंडे की आड़ में धार्मिक आस्थाओं पर हमला बता रहे हैं.

एडोल्फ हिटलर के समय भी यूरोप में ऐसी बहस देखने को मिली थी, जब 1933 में हिटलर ने जर्मनी में जानवरों को बेहोश किए बिना कत्ल करने पर पाबंदी लगा दी थी.

जीव अधिकार बनाम धार्मिक स्वतंत्रता यूरोपीय क़ानून के तहत जीवों की हत्या किए जाने से पहले उसे बेहोश करना ज़रूरी है ताकि उन्हें दर्द महसूस नहीं हो.

बेहोश करने की प्रक्रिया में जानवरों को कत्ल करने से ठीक पहले अचेत किया जाता है लेकिन इन देशों में धार्मिक कारणों से दी जाने वाली जानवरों की बलि में क़ानून से छूट दी जाती रही है, जिसमें परंपरागत तौर पर जानवरों को एक ही वार में गले से काटने की परंपरा रही है.

बेहोश करने की प्रक्रिया में जानवरों को कत्ल करने से ठीक पहले अचेत किया जाता है लेकिन इन देशों में धार्मिक कारणों से दी जाने वाली जानवरों की बलि में क़ानून से छूट दी जाती रही है, जिसमें परंपरागत तौर पर जानवरों को एक ही वार में गले से काटने की परंपरा रही है.

जानवरों के कल्याण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस परंपरा के चलते जानवरों को कत्ल के समय असहनीय दर्द सहना पड़ता है जबकि धार्मिक नेताओं का कहना है कि परंपरागत तरीके में भी जानवरों को कोई दर्द नहीं होता.

इन लोगों का ये भी दावा रहा है कि परंपरागत तरीके से भी जानवरों की तुरंत मौत हो जाती है और इसका तरीका सैकड़ों साल के चलन में बेहतर होता गया है ताकि जानवरों को कम से कम तकलीफ़ हो.

इन दोनों बहसों के बीच में कुछ यूरोपीय देशों ने धार्मिक कारणों से जानवरों का कत्ल करने वाले बूचड़खानों में सख्त प्रावधान लागू किए हुए हैं. इनमें नीदरलैंड्स, जर्मनी, स्पेन और साइप्रस जैसे देश शामिल हैं.

ऑस्ट्रिया और ग्रीस जैसे देशों में जानवरों के काटे जाने के तुरंत बाद उन्हें बेहोश करने का प्रावधान है.

बेल्जियम के तीन क्षेत्रों में से दो क्षेत्र- फ्लैंडर्स और वालोनिया- ने अब डेनमार्क, स्वीडन, स्लोवानिया, नॉर्वे और आइसलैंड की तरह वह प्रावधान अपना लिया है जिसके तहत जानवरों के कत्ल से पहले उसे बेहोश करना ज़रूरी है.

वैसे परंपरागत तरीके से जानवरों की कत्ल का तरीका, कोई इकलौता मुद्दा नहीं है जिसने यहूदियों और मुसलमानों को एकजुट कर दिया है, बल्कि दोनों समुदाय दूसरे मुद्दों पर भी एकजुट होते रहे हैं.

ख़तना और बाल अधिकार पिछले साल, आइसलैंड में एक क़ानून बनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया जो बिना किसी चिकित्सीय वजह के ख़तना किए जाने पर पाबंदी लगाने के विषय पर था, बाद में विवाद बढ़ने पर इसे आइसलैंड की संसद ने पास नहीं किया.

अदालत ने ये भी कहा था कि न तो माता पिता के अधिकार और न ही धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को शारीरिक तौर पर गंभीर और स्थायी बदलाव करने के लिए तर्कसंगत ठहराया जा सकता है.

हालांकि इस फ़ैसले को छह महीने बाद पलट दिया गया लेकिन इसको लेकर यहूदी और मुस्लिम समुदायों में काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी, दोनों समुदायों का कहना था कि ये फ़ैसला उनकी धार्मिक आस्थाओं पर पाबंदी लगाने जैसा है.

Monday, January 7, 2019

यह भारत की गलती नहीं जो स्मिथ और वॉर्नर ऑस्ट्रेलियाई टीम से बाहर हैं: गावस्कर

भारत की ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत की पूर्व क्रिकेटरों ने जमकर तारीफ की और अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया जिन्होंने कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम की बात कहकर इसे कम आंकने की कोशिश की. भारत ने चार मैचों की सीरीज 2-1 से जीती जो उसकी ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर टेस्ट सीरीज में पहली जीत है. ऑस्ट्रेलिया ने चार मैचों की सीरीज में लचर प्रदर्शन किया और अगर मौसम खराब नहीं होता तो भारत का जीत का अंतर इससे बेहतर होता.

कहा जा रहा है कि गेंद से छेड़छाड़ के कारण प्रतिबंध झेल रहे स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की अनुपस्थिति के कारण भारत को यह जीत मिली, लेकिन गावस्कर ने इसे मानने से इंकार कर दिया. गावस्कर ने मैच के बाद सोनी सिक्स पर कार्यक्रम में कहा, ‘ऑस्ट्रेलियाई टीम अगर डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ के बिना खेली तो यह भारत की गलती नहीं है. ऑस्ट्रेलिया उन पर कम अवधि का प्रतिबंध लगा सकता था, लेकिन निश्चित तौर यह माना गया कि एक साल का प्रतिबंध ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए अच्छा साबित होगा क्योंकि वे एक उदाहरण पेश करना चाहते थे.’

ऑस्ट्रेलिया में भारत ने रचा इतिहास, 72 साल में पहली बार जीती सीरीज

गावस्कर ने कहा, ‘भारत के सामने जो टीम उतारी गई वह उससे खेला और यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.’ गावस्कर के अनुसार कोहली की टीम और पूर्व की टीमों में मुख्य अंतर फिटनेस का है. उन्होंने कहा, ‘हम भी जीत के लिए खेले थे, लेकिन फिटनेस के मामले में यह टीम भिन्न स्तर पर है और कप्तान इसमें उदाहरण पेश करता है. हमारे समय में हम निजी तौर पर अपनी फिटनेस पर ध्यान देते थे.’

आपको बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम ने 72 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर पहली बार टेस्ट सीरीज जीतकर सोमवार को अपने क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा. सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर चौथा और अंतिम टेस्ट मैच खराब मौसम और बारिश के कारण ड्रॉ छूटा और इस तरह से भारत सीरीज 2-1 से अपने नाम करने में सफल रहा.

सिडनी की पिच, कोहली की कप्तानी, और याद आया 4 साल पुराना वो मोमेंट

इसके साथ ही उसने बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी भी अपने पास बरकरार रखी. भारत ने 2017 में अपने घरेलू मैदानों पर सीरीज 2-1 से जीतकर यह ट्रॉफी जीती थी. भारत ने स्वतंत्रता मिलने के कुछ दिन बाद पहली बार 1947-48 में लाला अमरनाथ की अगुवाई में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था. तब उसका सामना सर डॉन ब्रैडमैन की अजेय ऑस्ट्रेलियाई टीम से था. तब से लेकर अब जाकर भारत का सीरीज जीतने का इंतजार विराट कोहली की टीम ने खत्म किया.